जातिगत आरक्षण

जब भावनाओं को भी पैसों से तौलने का दौर चल रहा हो,
ऐसे में "खैरात" शब्द का मूल्य हीं क्या ?
वो तो सिर्फ जातिगत आरक्षण की वजह से हीं जिंदा है।

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